जब कौल कर ही लिया है, तो मैं आज कुछ न लिखूँगा.. तो आप भी कुछ न पढ़ना । आपको ब्लागवाणी पर यह ज़ब्बर टाइप शीर्षक दिखला कर यूँ ही फुसला कर बुला लूँ, और यहाँ एक वाह-वाह आलेख पकड़ा दूँ… यह  हमसे  न होगा ! अपने  मुँह मियाँ  मिट्ठू… वाः वाः कौन कहता है, कि  आपने  कभी  कोई  वाह-वाह पोस्ट भी लिखी है ? किसीके यह पूछने से पहले ही, यह बता देता हूँ कि, भाई इब मन्नैं भी एक गुट बना लिया है । आठ-दस फोन नम्बर भी बटोर लिया है । चाहोगे तो अपने पोस्ट किये जाने वाली टिप्पणी का डिक्टेशन भी दे दूँगा, मुफ़्त.. मुफ़्त.. मुफ़्त.. ! भले आप दरिया किनारे जाकर मुर्गी के अँडे छील कर उबाल लो, उस  उबले  अँडे का आमलेट तक हम्मैं निगलवा दो… लेकिन यह जान लो कि मेरी तो आठ-दस रेडीमेड वाह-वाह टिप्पणी  पक्की  ही  है । हमरा एक निर्गुट कबीर गैंग जो है । इसके सभी निर्गुणिया सदस्य , अपने  लोगों  के  लिये  वाह-वाह  हरमुनिया बजाने में निष्ठावान गुणी हैं । मैं अँट-शँट नहीं बक रहा भाई.. और  न  ही  मेरे  पास  इस  पोस्ट  को लँबा खींचने की फ़ुरसतिया-पावर है । डारविन के रिश्ते से स्वाइन जी कभी तो हमारे आगे और है