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माडरेशन की प्रतीक्षा में
Sep 6th
इस पहेली को हल करने के प्रयास में मुझे एक घटना याद आ गयी, दो दोस्त आपस में उलझे हुये थे, शायद उन्हें कुछ लगी हुई थी । पहले ने कहा, " अगर मैं चाहूँ तो, तुम्हारे ऊपर पेशाब भी कर दूँ और तू भीगेगा भी नहीं !" दूसरा उखड़ गया, " भला ऎसा कैसे हो सकता है ?" हो सकता है.. नहीं हो सकता है कि तू तू मैं मैं चलने लगी, दस बीस तमाशबीन इकट्ठे हो गये । पहले ने कहा, " चाहे तो शर्त लगा ले ।" दूसरा भड़क गया, " ऎसी अनहोनी पर शर्त क्यों लगा लूँ ?" अब शर्त लगा ले.. और शर्त क्यों लगा लूँ.. की नोंक-झोंक चलने लगी । किसी ने सुझाया, अरे आज़मा ले भाई , शर्त लगाने में क्या जाता है ? जो हारेगा , आख़िर उसी को पैसा भी तो भरना पड़ेगा कि नहीं ? बीस रूपये की शर्त लग गयी । अगर तू पेशाब में भीग गया तो बीस रूपये तेरे, वरना तुम्हें बीस रूपये देने पड़ेंगे । चल ठीक है, चल ठीक है ! पहला उसे कोने में ले गया, और उसके ऊपर झर झर मूत दिया । दूसरा सिर से पाँव तक तर हो गया । पर, आगे और है







