डा. अनुराग के बचपन पर कराह उठा यह पचपन
Feb 10th
जैसे जैसे डा. अनुराग की पिछली ज़बरदस्त पोस्ट को बाँचता जाता, दिल से.. हमारे वाले दिल से, कराह उठ रही थी, “हाय अमर तुम न हुये ।” ऎ भाई कोई यहीं खुन्नुस न निकाल लेना, कि “ अगर होते तो, क्या उखाड़ लेते ?” एकदम सच बात है, मैं क्या कर लेता.. ?
मैं बचपन में ही चुगद था, और विद्वान टिप्पणीकारों के मत में, सो तो अब तक हूँ । अब यह शब्द इतना सहज लगता है.. कि फ़ौरन ही हर ऎसे टिप्पणीकार की पारखी निगाहों का फ़ालोअर बन जाता हूँ । मेरे बाबा कोई चीज बरबाद होते हुये देख कहते.." सकल वस्तु संग्रह करहूँ आवैहिं एकु दिन काम, समय पड़े पर ना मिले माटिहूँ खरचे दाम । " सो अपना अमूल्य ( दो कौड़ी से कुछ कम.. का एक नाप ! ) मानव मष्तिष्क मौका-ए-नज़ाकत वा वक़्त-ए-ज़रूरत पर काम आने के लिये सहेज कर रखना अपना परम कर्तव्य समझता । ज़्यादा दिमाग लगाने से परहेज़ करता, " अरे होगा न… मुझे क्या ? " जैसा भाव मुझे दुलराता रहता । बस मियाँ ठूंस के खाओ और मस्त रहो । आपके सामने है.. खेलेंगे कूदेंगे वाले नवाब बने ऎंठ रहे हैं.. और पढ़े लिखे वाले.. रहे चप्पल चटकाय
अब तो खैर, ठूँसना ठूँसाना ग़ुज़रे ज़माने की बातें आगे और है
तुम पार नेट परमेश्वर तुम ही नेट पिता
Jan 18th
ॐ जय गूगल हरे, स्वामी जय गूगल हरे फ़्रस्ट (एटेड ) जनों के संकट, त्रस्त जनों के संकट एक क्लिक में दूर करे ॐ जय गूगल हरे… जो ध्यावै सो पावै दूर होवै शंका, स्वामी दूर होवै शंका सब इन्फ़ो घर आवै, सब इन्फ़ो घर आवै कष्ट मिटै मन का ॐ जय गूगल हरे… नेट पिता तुम मेरे शरण गहूं किसकी, स्वामी शरण गहूं किसकी तुम बिन और न दूजा, तेरे बिन और न दूजा होप करूं किसकी ॐ जय गूगल हरे… तुम पूरन हो खोजक तुम वेबसाइटयामी, स्वामी तुम वेबसाइटयामी पार नेट परमेश्वर, पार नेट परमेश्वर तुम सबके स्वामी ॐ जय गूगल हरे… तुम ब्लागर. के फ़ादर तुम ही इक सर्चा, स्वामी तुम ही इक सर्चा मैं मूरख हूं सर्चर, मैं मूरख हूं सर्चर कृपा करो भरता ॐ जय गूगल हरे… तुम सर्वर के सर्वर सबके डाटापति, स्वामी सबके डाटापति किस विधि एन्टर मारूं, किस विधि एन्टर मारूं तुममें मैं कुमति ॐ जय गूगल हरे… दीनबंधु दु:खहर्ता खोजक तुम मेरे, स्वामी शोधक तुम मेरे अपने फ़ण्डे दिखाओ, कुछ तो टिप्पणी दिलाओ साइट खड़ा तेरे ॐ जय गूगल हरे… बोरियत तुम मिटाओ टेंशन हरो देवा, स्वामी टेंशन हरो देवा गूगल अकाउण्ट बनाया गूगल अकाउण्ट बनाया पाया ब्लागिंग मेवा स्वामी पाया ब्लागिंग आगे और है
इतना विशाल देश.. क्या अकेले मेरे बस में ?
Jan 12th
हरतरफ़ चर्चा है, कि देश मुसीबत में हैं, आतंकी इसे रौंद रहे हैं, घोटाले इसे लील रहे हैं ! सत्यम भी आख़िरकार असत्यम साबित हो रहा है । अब, भला आप ही बताइये, मैं अकेला क्या कर सकता हूँ ? कल जोड़ने बैठा तो .. देश की आबादी निकली : 100 करोड़ जिसमें 9 करोड़ तो सेवानिवृत हैं, जिनसे शायद ही कोई उम्मीद हो नौकरीपेशा वर्ग में केन्द्रीय कर्मचारी ठहरे 17 करोड़ और राज्य कर्मचारी हैं 30 करोड़ इनमें शायद ही कोई काम करता हो ? और.. हमारे यहाँ हैं 1 करोड़ आई० टी० प्रोफ़ेशनल ! इनमें अपने देश के लिये कौन काम करता है, जी ?
18 करोड़ तो बेचारे अभी स्कूलों में ही हैं, इनसे क्या होना है ? इन 8 करोड़ दुधमुँहों को, जो अभी 5 वर्ष भी पार नहीं कर पायें हैं..तो अलग ही रखिये ! यह 15 करोड़ बेरोज़ग़ार अपनी ही चिन्ता में हैं… देश के लिये… बाद में देखा जायेगा ! और यह 1.2 करोड़ बीमार तो अस्पतालों में कभी भी देखे जा सकते हैं, आतंकवादी इन्हें भले न बख़्शें, पर यह बेचारे अभी कुछ करने लायक ही नहीं हैं , सो इनको तो आप फ़िलहाल बख़्श ही दो ! जरा जोड़िये तो… कितने हुये ? 98 करोड़.. आगे और है
अपनी उनके संग सुरक्षित ड्राइविंग … …
Jan 8th
वो अन्डरस्टैंडिंग थी और ये सियासत है !
Dec 22nd
स्थान: सीमा चौकी, इस बार उत्तर-पश्चिम क्षेत्र बात बात पर उबल पड़ने और भारत माँ की सौगंध लेने की आदत के चलते रामनिहारी जाटव अपने बटालियन में रामबवाली भारती पुकारे जाते थे ! हमारे चरित्रनायक रामबवाली जी अब लांसनायक भारती के नाम से पुकारे जाने लगे हैं । दीपावली मनाने दो वर्ष बाद छुट्टियों में घर आये हैं । सब ठीक ठाक गुज़र रहा था, मात्र चार दिन ही रह गये थे, कि बेस से वारंट आगया.. … रिपोर्ट इमिडीयेटली ! बीबी ने उनका सामान बाँधा, उन्होंनें कुलदेवी के सम्मुख सिर पर क़फ़न बाँधा और चल पड़े लाम पर ! रिपोर्टिंग की औपचारिकतायें पूरी हुईं, एक संक्षिप्त मीटिंग… और यह तय पाया गया कि जिसको जिस क्षेत्र की अधिक जानकारी है,उन्हें वहीं भेजा जाय ! आज लगभग दस दिनों बाद कुछ लिखने बैठा हूँ |ये अन्डरस्टैंडिंग है…का दूसरा भाग पूरा करना शेष था । ब्लागर की सीमित दुनिया में सुरक्षा संचेतना सुनामी या कहिये कापी-पेस्ट काँव-काँव के थमने की प्रतीक्षा में स्वामी का यह आम आदमी पाँच दिनों के लिये टीकमगढ़ के बंज़र की खाक छान आया ! बस ऎंवेंई ही… वहाँ की दुरावस्था पर बहुत कुछ सुना था, सो देख भी आया ! वहीं पाकिस्तान के विषय में गाम की आगे और है
चैट्क्क.. डोन्ट वरी फ़ॅऽर इट, अंकल !
Dec 8th
यह विषय पड़ा तो बहुत दिनों से था… पर वही सनातन रोना, कुछ असलियत का और कुछ फ़ैशन में, बोले तो.. समय का टोटा, वह तो आपके पास भी होगा ! ब्लागिंग और लिखने का विषय ? अरे, राम भजो… . जिस दिशा में भी नज़र डालो, विषय ललकार रहे हैं ! ब्लागर वही, जो बात पकड़ बतंगड़ बनाये ! टैग जो मन आये, वही घुसेड़ दो… संस्मरण, संवेदना, हलचल, विविध, व्यंग्य या कुछ भी ? अपुन के समीर भाई जी ने कहीं लिखेला है, ” ब्लागिंग की लत लग भर जाये, फिर तो सोते में, जागते हुये , रास्ते में, श्मशान में, लड़की में, कड़की में.. जित देखो ब्लाग सब्जेक्ट , जैसे मीरा के कान्हा ! उन्होंने तो अपना पक्का इंतज़ाम कर ही लिया है..लोकल ट्रेन के डिब्बों में भी अपना माल ताड़ लेते हैं, और मसाला लाइब्रेरी में मिल जाता है, सेफ़ हैं.. लकी हैं ! पर, मुझे तो पहले का सोचा हुआ हर एक नुक्ता.. जैसे अब कुरेद रहा हो !हुआ यह कि चिट्ठाचर्चा के जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौग़ात मिली पर मेरी एक टिप्पणी दर्ज़ होगी, “….. लट्ठ ताऊ का पेटेन्ट है, राज भाटिया छुट्टियों पर निकले हैं, और यहाँ.. बिटिया को उड़ान भरने की लेट आगे और है
सनद रहे कि यह नकल है..
Dec 7th
अब ढूँढ़िये, इसका मूल लेखक ? यदि आप जागरूक पाठक हैं, तो पहचान ही जायेंगे.. इस पोस्ट के मूल लेखक को… नहीं पहचाना ? कोई बात नहीं., फिर तो.. यह रचना मेरा हिन्दी के प्रसार में योगदान माना जाये और इस नक्काल के पोस्ट-मर्म को अनदेखा कर दें ओ पैणचो मंत्री लोकी की करदे ने, हुण पता लगिया । ओ पता तां पैलां ही सी, पर अद्दे जाके दिसदा पिया वे। ये वो संवाद थे जो मुंबई के किंग्स सर्कल से सटे पंजाबी कॉलोनी में एक दुकान पर चल रहे थे। तीन लोगों के ये हिंदी-पंजाबी मिश्रित संवाद इतने रोचक थे कि मैने इनकी कुछ बातें अपने अदने नोकिया 2626 पर रिकॉर्ड कर लिया लेकिन अगल बगल उठ रहे ट्रकों और काली-पीली टैक्सियों के उठते शोर के बीच सब कुछ दब गया। अपने एक मित्र के साथ एक दुकान पर कुछ काम से गया था, वहीं पर ये रोचक संवाद सुनने मिले। ये रोचक संवाद जरा आप Text में देखें । पहला – ओ साले मंत्री अपणी मां ** रहे सी, पैण चो कर (घर) विच् टांगा विच टांगा डाल के पये होणगे मां दे लौ* दूसरा – उन्ना नु लोकां नाल की मतलब, माचो खुद ते ऐश-उश करांगे पांवै ( आगे और है











