देसी मायने-ज़मेन्ट गुरु, आज किये खुलासा
Apr 14th
सुना है, आज शाम IIM के पुरफ़ेसर लोगों को भी चारा चटा देने वाले श्रीयुत लालू प्रसाद यादव ’ जी ’ ने अपना चुनाव प्रचार ख़त्म होने के बाद एक प्रौस-कानफ़िरेन्स बुलाया था । जिसमें उन्होंने जेपी अन्दौलन में अपने जेल जाने के अलावा.. देश के लिये किये गये अन्य त्यागों का भी ख़ुलासा किया ! चैनल वालों की तरह.. अपनी तो नमक मिर्च लगाने की आदत नहीं, सो.. पूरा ब्यौरा ज्यौं का त्यौं पेश कर देता हूँ !
हम आप लोग का इसलीए बोलाया हूँ, के आपका ई मेडीया में एक दू ठो बुरबक भाई.. ऎ हाल्ला मत मचाईये, बताता हूँ.. सब बताता हूँ..खुलासा करता हूँ.. हम ईहाँ दुध का दुध अउर पानी का पनिये करने को बईठें हँय न ? बाकी जनतवा तो सब देखबे करती है.. ऊसको भी आपलोग में से एगो दुगो भाई भरम में डालने का कारज करती है.. त ऊ बुरबकै कहायगा के नहिं ? जो पत्तरकार सेन्सीटीव ईस्यू सब को आईडेन्टिफ़ाई नहिं करता है,ऊ सब जो अडवनिया के अईसा फ़ासिस्ट बिचारधरा बाला डैन्ज़रस आदमी का पईसा खाके पता नहीं काहाँ काहाँ से झुट्ठा खबर सब उड़ाता रहता है ।
ई लोग कहता है के हम जनता का भरडिक्ट पर गोबर लीपने के मँसा से आगे और है
ऎई , आज फिर निट्ठल्ले पर हो क्या ?
Apr 11th
शिवभाई का मेसेज़ आया.. यदि मैंनें कुछ लिखा नहीं, तो वह कवितायें लिख लिख कर ब्लागजगत में तबाही मचा देंगे ! सो, मैं सनद्ध हुआ, कि यह यंत्रणा मेरे को ही झेल लेने दो, भाई ! नीलक्ण्ठ बन जा ब्लागर अमर कुमार ! कविता ही तो लिखना है.. कुछ लिख मार, लोगों के समझने के फेर का मौका उठा ले ! बड़े मौके हैं, पोयट्री फ़ील्ड में .. किसी को धता बता दो.. आप नहीं समझ सकते , मेरी कवियायें ! यह लोकधर्मी है.. प्रयोगधर्मी है.. या अधर्मी है.. इनके बीच की एक बारीक रेखा आपके.. ना ना आपके बस की नहीं है, आपके बस की नहीं है, भाई साहब ! लीजिये !
एक समय हिन्दी साहित्य में दाढ़ीवादी युग आया था ! चिकने चुपड़े पंत जी, और छितरी दाढ़ी खरखराते मिज़ाज़ के निराला जी ! कवि का मिज़ाज़ दूर से ही पहचाना जाता था, दाढ़ीवादी.. मायने प्रगतिवादी याकि यथार्थवादी .. बिना दाढ़ी वाले प्रेम के अग्रदूत प्रकृति के सौन्दर्य को निहारते वाज़िद अली टाइप ! समीरलाल ’ समीर ’ जी तो आधी दाढ़ी वाले है.. वह होते तो भला किन वादियों की कतार में बैठाये जाते ? शायद तभी उनकी मोतियाँ शुरुआती संग्रह में ही बिखर सीधे शीर्षक ही बन गयी होंगी ? आगे और है
एक शाम अपने कुकूर जी के नाम
Apr 6th
आज शाम मैं अपना कुत्ता चराने निकला.. वह मुझे रोज ही शाम को घुमाने ले जाता है ! कोई चारा न देख मैं बेचारा टिगीड़ टिगीड़ चाल से उसको फ़ालो करता रहता हूँ ! इस दौरान मन ही मन कई पोस्ट लिख चुका होता हूँ, लौटते समय टिप्पणियाँ समेटते समेटते घर के पास वाले नुक्कड़ पर ढेर सारा धन्यवाद उड़ेंलना जैसे नियम हो.. यह निजी बातें हैं, आपको क्या ? आज एक ज्ञानोदय होता भया । इस ज्ञान का उदय तो नित्य ही होता रहा होगा, बट आई कुडन्ट नोटिस ! माहौल का बहुत ही फ़र्क पड़ता होगा न ? क्योंकि आज इस ज्ञानोदय की किरणें बरबस ही दिमाग में प्रविष्ट कर गयीं ! मुझको ज्ञान मिला, इससे आपको क्या ? सुना किया है कि, ज्ञान बाँटने से बढ़ता है.. सो थोड़ा थोड़ा आप लोग भी लेते जाइये । नहीं भी लेंगे, तो मेरा क्या ? दिन भर नामांकन की गहमागहमी रही, मेरा कोई लेना देना नहीं, फिर भी यह सब देख थकान हो रही है…फिर भी फ़र्ज़ निभाने की रस्म निभाने को ही सही, मैं आज फिर कुत्ते के पीछे पीछे घूमने निकल पड़ा.. मेरी तो समूची दुनिया ही इस ’ फिर भी ’ पर टिकी है । तो, आगे और है
मेरे राहत का सबब है, मेरा पाकिस्तान
Apr 5th
कोई इसे ग़द्दारी न समझ लेना, मेरे ख़ातिर तो राहत का सबब है, मेरा पाकिस्तान ! यह सरज़मीं मानो ज़न्नत की सिफ़त रखता, जो कहलाता है पाकिस्तान ! कितनी ग़लतफ़हमियाँ बनी रहतीं जो मैं कभी न जा पाता अपने पाकिस्तान !
मेरे हालिया पाकिस्तान यात्रा की तस्वीरें यहाँ देखें, और बतायें कि पाकिस्तान कितनी बड़ी ज़रूरत है, सच्ची..नो किडिंग !
बाँटो और दुआयें लोयह आख़िरी बार बताता, तुमकूँ
Apr 4th
वनगमन से लौट आने की व्यथाकथा जारी रहेगी, इससे पहले वहाँ मिला एक महत्वपूर्ण स्कूप बता देना राष्ट्रहित में है ! इसलिये आमोद प्रमोद की इस दुनिया में ’ देशहित ’ का एक ब्रेक लेने की अनुमति चाहूँगा ! अईयो साईं आला रे आला ने बहुसंख्यक राष्ट्रीय पशुवत जनता को दूसरे पायदान पर और अल्पसंख्यक होते जाते राष्ट्रीय पशु बाघ की प्राथमिकता को ऊपर क्या रख दिया.. फर्रोसै देश में मज़ाकिया एस. एम. एस. का सैलाब आया हुआ है ! हरदम जलते रहेंगे, मुये ! वन में आनन फ़ानन देश को बरबाद करने में माहिर निट्ठल्लों के दस्ते ज़ोश में आ गये है ! आ गये तो आ गये, आप?
वही तो ? मैं यूँ ही निट्ठल्ला बैठा हुआ बिनावज़ह कुड़कुड़ाया करता हूँ ! हमारा घर है, हम चाहे तो इसमें आग लगा दें, तुम्हें क्या ? घर के चिराग़ यूँ ही गुल हुआ करें, शहर में तो रोशनी आयेगी ! अरे ? यह तो एक मिसरा तैयार हो गया !
बाँटो और दुआयें लोअनूप जी लताड़े गये – बिहार की जनता को राहत
Apr 1st
आम तौर पर पोस्ट लिखने बाद इनको टिप्पणी देखने गिनने की ज़रूरत नहीं पड़ती ( या कहिये कि इतनी फ़्लाप पोस्टों के बाद शर्म और डर से न जाते होगे ! ) कल रात की पोस्ट प्रकाशित होने में नेटवर्क बहुत दोस्ताने तरीके व्यवहार नहीं कर रहा था ! कारण जो भी हो, यहाँ बताना उचित न होगा, कि ऎसा किन्हीं पहुँचे हुये स्वनामधन्य ब्लागर की ब्राडबैन्ड वालों के मध्य रसूख़ के चलते हुआ है ! संजो कर सुबह प्रकाशित करने का मन बनाया..सोने चला गया !
सुबह इसको प्रकाशित करने गया तो, देखा कि पोस्ट प्रकाशित हो चुकी है ! यह कैसे हुआ ? यह चिट्ठाचर्चा के लिये एक नये विवाद का माल है ! शायद सर्वर एरर की वज़ह से तीन टिप्पणियाँ भी भटक आयीं थी । आनन फानन इनका उत्तर देकर, अपनी दावेदारी मज़बूत करने की ग़रज़ से उसी में उलझ कर रह गया !
अभी क्लिनिक से लौटते ही नित्य की भाँति अपना बैग पटका, कम्प्यूटर आन किया.. और हालचाल लेने सीधे अम्मा के पास पहुँचा । एक क़ाफ़ी पियूँगा.. इतनी सारी बातें पंडिताइन से भी करनी पड़ीं ! फिर फ़ेवरिट का बट्न दबा कर चिट्ठों की चर्चा को खोला । आशा के विपरीत बिना कोई मज़बूरी आगे और है
शब्दों की तलाश में निकली एक प्राणहीन पोस्ट
Mar 14th
कुछेक अहसास को आप शब्दों में बाँध नहीं सकते । लगता है, बहुत कुछ ऎसा ही अभी सारे देश और पूरे विश्व में देखा गया है । इसकी आप भर्त्सना कर लें, निंदा करें, बहसियायें, गरियायें.. फिर भी इस तरह के वतनी शर्मिन्दगी को लफ़्ज़ों मे कैद न कर पाने की छटपटाहट जस की तस बनी रहती है । किसी उपयुक्त शब्द को तलाशने आप कंदराओं में क्या जा पायेंगे, क्योंकि आपका तपोबल तो बलात्कार ( चलो भाई, मानसिक ही सही ) करते रहने और अपने साथ अनेक ( आर्थिक स्तर के ) बलात्कार होने देने में ही चुक गया है । ध्यान रहे, कि यहाँ मैं नैतिकता का कोई प्रश्न ही नहीं उठा रहा । मुझे उठाना भी न चाहिये, क्योंकि अनैतिकता की थाली में खाते रहने वाले कराह भले लें, पर गरजा नहीं करते । यह तो.. ऎंवेंई उबाल है, संभवतः कल तक ठंडा भी हो जाय । एक ई-मेल ने कुछ कुरेद दिया, सो आप मित्रों के सामने बिलबिला पड़ा । नैतिकता की कस्तूरी की खोज में भागा करता था, ज़नाब फ़लाँ-ढिंकाँ ने फ़रमाया … इसको कहाँ ढूँढ़े रे बंदे.. शाम को बुलाया है कि मेरे भीतर से ही बरामद करके दिखा देंगे । अब देखिये.. क्या आगे और है











