बस यूँ ही निट्ठल्ला

Follow me on TwitterRSS Feeds

  • मुखपृष्ठ
  • आवरण पृष्ठ
  • कुछ तो है.. जो कि,
  • पचपन बचपन
  • भूले दस्तावेज़
  • वेबलॉग पर
  • शब्दकार इस गली के
  • bloggerowordpress.png

    मुला चिट्ठाचर्चा से इसका कउनौ रिलेशन नहिं है...

    एक्ठो रहें बड़े ओहदे वाले बड़का ब्लॉगर.. सो डिस्केशन डिस्केशन में उनका डिलेवर भी ब्लॉग-श्लॉग लिख लेने लगा रहा । उनकी काम वाली बाई भी कुछ कविताई की बेहयाई कर लेती रही, सो  वहू  ब्लॉगर को पकड़ लिहिस । उनका नौकर भी कहीं से कुछ टीप टाप कर एक रेजिस्टर में चेंप देता रहा, छापे में कौन छापता.. सो खुदै कम्पूटर नामक एकु मशीन में लिख कर टाँग देता रहा । ई-सब आदत पकड़  लिहै  से  उनकी  अकड़  की ...
    More
  • j0443837.jpg

    मैं चर्चा का पुरज़ोर विरोध करता हूँ......

    इधर मॉडरेशन बनाम डिस-ऍप्रूवल के खतरें इतने बढ़ते जा रहे हैं कि, मुझे अपनी टिप्पणियों का एक डुप्लीकेट सहेज रख छोड़ना होता है । यह मेरा मौलिक प्रयास है, और कालाँतर में यह आपात्काल के बाद आये हुये साहित्य से भी अधिक हिट होने की सँभावना रखता है ( चाहें तो आप अपनी प्रति सुरक्षित करवा लें ) साथ ही मैं मैं रवि छत्तीसगढ़ी रवि रतलामी भाई से अनुरोध करूँगा कि यदि वह  मेरी  हरकतों  को  अनदेखा  न  कर स...
    More
  • anim01291_e0.gif

    आज कंमेंटियाने की ज़िद ना करो......

    इतने दिनों की ग़ैरहाज़िरी की भरपायी करने की ठान रखी थी, सोचा कि आज दो नये पोस्ट अवश्य दूँगा । मेरे सँकल्प को जब नींद टँगड़ी मारने लगी तो, सोने से पहले अम्मा को हिदायद दी कि, एक ज़रूरी काम है.. सो मुझे तीन बजे जगा दीजियेगा । घर में बूढ़े-बुज़ुर्ग होने का यह एक फायदा तो है ही कि, उनसे ऍलार्म का काम बखूबी लिया जा सकता है । फिर यह तो ठहरीं, ढीले स्प्रिंग की बिगड़ी हुई घड़ी ! अल्ल्सुबह पौने तीन बजे ही इन्होंनें टुन्नु टुन्नु की ऎ...
    More
  • gyanduttki.gif

    बेशक पोस्ट टिप्पणीऽऽ ठेलो.. .....

     बेशक पोस्ट टिप्पणी ठेलोऽऽऽऽ.. निट्ठल्ला ये कैताऽ पर ऎसी टुँगी कभी न छोड़ो, जिससे दिल दुखे व भगदड़ मचता हालिया घटनाक्रम से तो यही लग रहा है कि “चलो रसातल ओर हो ब्लॉगर .. चलो रसातल ओर“ भविष्य का हमारा ब्लॉगगीत बन जायेगा ! फोटो ऎडिटिंग टूल्स के साथ यह निट्ठल्लाकारी खींच-तान उन्हीं अनमने क्षणों की देन है । कभी “एकला चोलो रे“ से ब्लॉगिंग आरँभ किया था लोग जुड़ते गये, हौसला बढ़ता गया । लगता है कि मैं खुद बखुद अपने क...
    More

लै भाई, मन्नैं बी इक पहेल्ली पूछ लैण दे ।

Jun 1st

★ डा. अमर कुमार ● बेतक़ल्लुफ़ | 114 ने पढ़ा

19 टिप्पणियाँ

धन्यवाद भाई जी, तन्नैं होश दिलायी के बिन पहेल्ली पुच्छै इह निट्ठल्ले को ब्लागर मानता ए कोण्या ? भाई, आप बात तो ठीक कहवै सौं, बुरी सँगत में पड़कै, मैं भी बड्डी बड्डी पोस्ट लिखण लाग्यै लग सै । जे पहेल्ली ना पुच्छी ते फेर ब्लागर किस्सा ? आज रस्म अदा कैण वास्ते इक निट्ठल्ली पहेल्ली हो जाण दै । मन्नैं इनाम वीनाम देना कोणी, मर्ज़ी हो बूझ.. ना मर्ज़ी बने  तो टिप्पण आले बक्से से परे नट जा ।          ये रही अपणी पहेल्ली..

एक मारे से मरा काण खोल के पढ लै, एक मारे से मरा.. दो सँदेशे से मरे और सँदेशी मरा जब तीन चले परदेश ते कुल पहेल्ली यो करके बनी के

एक मारे से मरा दो सँदेशे से मरे सँदेशी मरा कब ? जब तीन चले परदेश

मुस्किल आण पडी हो ते यो बता दूँ के… यो पहेल्ली लाल लँगोटे वाले लँगूर के बास के खानदानी से मतलब राख्यै सै !

  लगे हाथ निट्ठल्ले का ग़ज़नी के स्क्रीन टस्ट से रिजिक्ट फोट्टू भी देखता जा, यो पहेल्ली का हिस्सा नाय

       

 

..

बाँटो और दुआयें लो
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...
टाइमपास, न जाने क्यों परिभाषित न हो सका, मेरा लिखा मत पढ़ो

आज बड़े खुश लग रहे हो ?

May 26th

★ डा. अमर कुमार ● बेतक़ल्लुफ़ | 47 ने पढ़ा

10 टिप्पणियाँ

डिस्क्लेमर : यह पोस्ट श्री बज्राँग बली के नाम पर आरँभ किया जा रहा है, अनायास बिजली गुल हो जाने की दशा में पोस्ट पूरी न हो पाने का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व केन्द्र व निष्कामी राज्य सरकार का होगा । इसका मायाराज से कोई लेना देना नहीं है !

रायबरेलीवासी मतदान के तत्काल बाद से विद्युतबाधा के बँधक बने हैं । सोनिया भाभी से माया ननदिया को उचित नेग मिलने तक यह तमँचा लगा रहेगा । अतः ब्लागिंग की बत्ती भी गुल है ! अफ़सरान के चेहरे की बत्ती गुल है, चाटुकारों की बत्ती गुल है । हे कपि, समय पड़े पर तू ओबामा के सँग हो लिया  और, कुसमय पर अपने देशी अडवानी श्रीराम चरण कमल रज  से ही रूठ गया ।  उनकी छोड़,  हम दीनों की तो सुन ले..

“ मुठिका एक महा कपि हनी ।

रुधिर बमत धरनीं ढनमनी ॥ “

अरर..रर..र.. बिजली जाने ही वाली है, आने का भरोसा भले ही न हो.. जाने का पूरा भरोसा रहता है । यानि कि कार्यक्षमता में  पचास फ़ीसदी के सुधार से आप मुकर नहीं सकते । लुप्प लुप्प होन लगा भाई.. जल्दी समेट लें, जाण वाली  है । जाने दो, मेरा क्या ?

आपको ही यह पोस्ट पूरी न पढ़ने को न आगे और है

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...
टाइमपास, न जाने क्यों परिभाषित न हो सका, मेरा लिखा मत पढ़ो

विरोध का यह तरीका, न जाने क्यों परिभाषित न हो सका

May 20th

★ डा. अमर कुमार ● बेतक़ल्लुफ़ | 38 ने पढ़ा

5 टिप्पणियाँ

शहीद की अगली कड़ी देनी है । साथ ही अपना भी कुछ लिखने का मन बन रहा है, पर विरोध या अंतर्विरोध का कोई स्वर निकल ही नहीं पा रहा । क्या करें ?  सा रे गा से  उठाने पर  मा पर जाकर टिक जा रहा है ! यहीं से एक मुरकी लगाकर मा पर ही बिलँबित होना ठीक रहेगा.. कहीं ज्यादा क्लासिकल न हो जाय ?  मेरी पोस्ट सिर से ऊपर निकल जाने की शिकायतें वैसे भी अधिक आरही हैं । क्या करें ? ब्लागिंग छोड़ दें ? ख़ैर, जब छोड़ेंगे तब देखा जायेगा । आज तो कुछ लिखने की होती ही है, मँगल है.. वह भी बुढ़वा मँगल ! सुना है, ब्लागजगत में ’ बुढ़वा ’ की बहुत चलती है । सो, आज एक बार फिर ’ प्रयास करने ’ में क्या जाता है ? बुढ़वा अगर खुश हो गये, तो कोई भी माँगलिक अमाँगलिक अपशकुनी पोस्ट भी हिट ही समझो ! हिट हो.. या शिट, जब तलब लगी है, तो कौन रोक रहा है ? लिखना है तो लिख आज पिटे हुये लालू को दौड़ाया जाय.. ? कुछ ही दिनों में उनकी पोस्ट-वैल्यू टके की तीन भी शायद ही रहे ? ना ना, निट्ठल्ले.. अपने कबीर को मत भूल.. ’निर्बल आगे और है
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...
टाइमपास, न जाने क्यों परिभाषित न हो सका, मेरा लिखा मत पढ़ो

He is obselete, who is he ?

May 15th

★ डा. अमर कुमार ● बेतक़ल्लुफ़ | 120 ने पढ़ा

14 टिप्पणियाँ

यूँ तो अपन को किसी लफ़ड़े में पड़ने की आदत तो है, नहीं ? अब तक तक तो आप भी जान गये होंगे,कि, मैं अपना दामन बचा कर दूर से तमाशा देखने वाला एक आम शहरी आदमी हूँ । चाहें तो, मुझे शरीफ़ भी कह लीजिये, तो भी मैं बुरा न मानने का ! इसलिये मैं डा. अरविन्द के यहाँ से आते शोर से अपने को अलग ही रखे रहा । एक ब्लागर  दूसरे ब्लागर को  दे ही क्या सकता है, भला ? फ़क़त दो चार टिप्पणी या गाली गलौज़ तो आम बात है, ऎसे शैतानी पोस्ट पर  भी यदि साधु वाद आ जाय.. तो अपवाद ही मानो ! अपवाद यूँ कि, साहित्यिक गोष्ठियों जैसी नेटवर्किंग यहाँ उतनी परिपक्व न हो पायी है, या फिर कोई हिन्दी ब्लागर अपने सम्मान समारोह का आयोजन करवा कर उसमें पैसा लगाने जैसा ज़ोखिम अभी तो नहीं ही ले रहा है ! आगे की, ….?… जाने ( इंडिया सेक्यूलर या नान-सेक्यूलर, जब तक यह सुप्रीम कोर्ट तय करें.. तब तक यह स्थान रिक्त ही रहने दो ) ! एक ब्लागर की पहचान खतरे में है, चलो बड़ा अच्छा है.. यह गवारा न हुआ

दूर की कौड़ी निहार रहे.. या अपने ब्लागरीय सँदर्भ तलाश रहे हों, भाई ज़ान आगे और है

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...
टाइमपास, न जाने क्यों परिभाषित न हो सका, मेरा लिखा मत पढ़ो

आख़िरी ज़रूरत – µ पोस्ट

May 6th

★ डा. अमर कुमार ● बेतक़ल्लुफ़ | 29 ने पढ़ा

13 टिप्पणियाँ

एक सफल मनुष्य, जो अपने जीवन में हर कुछ हासिल कर चुका हो, अब और क्या चाह सकता है ?

अपने जीवित रहने के चँद ज़रूरतें, और कुछ नहीं !  यानि  एक डाक्टर, एक वकील और ज़ेड सेक्यूरिटी !

Technorati Tags: ज़रूरतें,Z catagory,मस्ती,Micro Post,माइक्रो पोस्ट,Blogger,हिन्दी,Just in jest बाँटो और दुआयें लो
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...
टाइमपास, न जाने क्यों परिभाषित न हो सका, मेरा लिखा मत पढ़ो

टिपेर तंत्र के अघोरी

Apr 28th

★ डा. अमर कुमार ● बेतक़ल्लुफ़ | 63 ने पढ़ा

13 टिप्पणियाँ

 

Technorati Tags: टिप्पणी,Controversy,चिट्ठाचर्चा,Blogger,निट्ठल्ला,Comments,Hindi Satire,Cartoon बाँटो और दुआयें लो
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...
टाइमपास, न जाने क्यों परिभाषित न हो सका, मेरा लिखा मत पढ़ो

अमारा मौसी का बेटी

Apr 22nd

★ डा. अमर कुमार ● [...] | 99 ने पढ़ा

12 टिप्पणियाँ

स्पीच का बात को पिरेस वाला इतना मच मच मचायेला कि मामला सीरियस हो रैली है, मैडम का वास्ते ! झप्पी बोले तो.. झप्पी ! अक्खा इंडिया में देखो.. पिरेस में गँदा लोग भरेला है, बाप ! तू जा के मैडम को सारी बोल दे , सरकिट !

सरकिट गोल ? अमर सिंग अपुन को इच सरकिट बना डाला.. अपना पालिटिक्स में ! माफ़ी माँग ले, सँजू बाबा !

बाँटो और दुआयें लो
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...
टाइमपास, न जाने क्यों परिभाषित न हो सका, मेरा लिखा मत पढ़ो
«12345»...अँतिम »
  • Blogvani.comचिट्ठाजगत

    निट्ठल्ला-ई-मेल सेवा

    Blogs, News & Videos
    www.hamarivani.com

  • टॉप पर ? नहीं भाई, बस हिट है !

    • झूठ पकड़ने वाला रोबॉट झूठ पकड़ने वाला रोबॉट जब मैं छोटा बच्चा था, कभी शरारत नहीं करता था.. ... (105)
    • बेशक पोस्ट टिप्पणीऽऽ ठेलो.. .. बेशक पोस्ट टिप्पणीऽऽ ठेलो.. ..  बेशक पोस्ट टिप्पणी ठेलोऽऽऽऽ.. निट्ठल्ला ये कैताऽ पर ऎसी टुँगी ... (59)
    • मेरे राहत का सबब है, मेरा पाकिस्तान मेरे राहत का सबब है, मेरा पाकिस्तान कोई इसे ग़द्दारी न समझ लेना, मेरे ख़ातिर तो राहत ... (53)
    • अमारा मौसी का बेटी अमारा मौसी का बेटी स्पीच का बात को पिरेस वाला इतना मच मच ... (37)
    • औरत .. .. .. मसालेदार ! औरत .. .. .. मसालेदार ! दौड़ आये यहाँ तक , भला इससे ज़्यादा मसालेदार औरत ... (27)
  • इस हफ़्ते का बॉक्स ऑफ़िस

    • झूठ पकड़ने वाला रोबॉट - 310 ने पढ़ा
    • “… .. ….. .. … .. ? ” - 262 ने पढ़ा
    • बेशक पोस्ट टिप्पणीऽऽ ठेलो.. .. - 258 ने पढ़ा
    • मुला चिट्ठाचर्चा से इसका कउनौ रिलेशन नहिं है - 193 ने पढ़ा
    • मैं चर्चा का पुरज़ोर विरोध करता हूँ… - 172 ने पढ़ा
  • निरी निट्ठल्लई का डिसक्लेमर

    September 2010
    M T W T F S S
    « Jul    
     12345
    6789101112
    13141516171819
    20212223242526
    27282930  
    • Recent comments
    • Popular posts
    • Archives
    • Tags
    • Categories
    • आपबीती (2)
    • उर्दू किसकी ज़ुबाँ (2)
    • कभी कभी मेरे दिल में… (2)
      • मेरी लँतरानियाँ (1)
    • कमज़ोर सरकारों पर (2)
    • तलाश साफ़ सुथरे दिमाग की (5)
    • पाकिस्तान तलक (1)
    • बुरबकई (4)
    • बेतक़ल्लुफ़ (27)
      • निट्ठल्लाकारी (3)
      • मॉडरेशन (1)
    • ब्लॅगिया का झस (6)
    • मिनी पोस्ट (1)
    • मॉडरेशन (1)
    • हरकत-उल-अमेरिका (1)
    • होली (15)
    Blogger Elite Plebian अमिताभ बच्चन अल-क़ायदा आत्मग्लानि इलाहाबादी उनकी टिप्पणियों पर उर्दू कभी कभी मेरे दिल में... काला कोट काहे-भाई-काहे-परेशान-है खींचाताना चिट्ठाचर्चा संदर्भ चिट्ठा्चर्चा सँदर्भ टाइमपास टिप्पणी दीन और दाढ़ी न जाने क्यों परिभाषित न हो सका नास्तिक चिंतक निट्ठल्लेखंडे पाकिस्तान पूर्णेंदु सम्मान बनर-खुज़ली बात बेबाक बुरबकई बेतक़ल्लुफ़ बेनज़ीर बेसिर- पैर की भात दाल मिनी पोस्ट मिलीजुली सरकार मूड मेरा लिखा मत पढ़ो मेरी पड़ोसन मोमिन योनिरह्स्यकम सँग साथी सँगी साथी संदर्भहीन व्याख्यायें सत्ता के संघर्ष सहपाठी होली ख़ुदा के लिये फ़ुरसतिया
    • July 2010 (1)
    • June 2010 (1)
    • May 2010 (1)
    • April 2010 (1)
    • March 2010 (2)
    • January 2010 (1)
    • September 2009 (2)
    • August 2009 (1)
    • July 2009 (2)
    • June 2009 (3)
    • May 2009 (4)
    • April 2009 (8)
    • March 2009 (1)
    • February 2009 (1)
    • January 2009 (3)
    • December 2008 (4)
    • November 2008 (1)
    • August 2008 (1)
    • July 2008 (2)
    • June 2008 (3)
    • May 2008 (2)
    • April 2008 (5)
    • March 2008 (6)
    • February 2008 (5)
    • December 2007 (3)
    • November 2007 (1)
    • चलो, मेरा लिखा मत पढ़ो, पर इसको तो न छोड़ो (29)
    • झूठ पकड़ने वाला रोबॉट (23)
    • मैं चर्चा का पुरज़ोर विरोध करता हूँ… (21)
    • लै भाई, मन्नैं बी इक पहेल्ली पूछ लैण दे । (19)
    • हाहा ही ही.. बजट्ट अली बजट्ट अली, हो बजट्ट अली (18)
    • डा. अनुराग के बचपन पर कराह उठा यह पचपन (17)
    • अनूप जी लताड़े गये – बिहार की जनता को राहत (17)
    • बेशक पोस्ट टिप्पणीऽऽ ठेलो.. .. (17)
    • चले जाना नहीं, होश उड़ाय के (16)
    • सनद रहे कि यह नकल है.. (15)
    • निठल्ले का भी कोई परिचय: चिट्ठाचर्चा में इसको दूर से रिस्ता हम दिखायेंगे, फिर आप बैठकर चर्चा का पुरजोर विरोध करते रहना। आखिर ...
    • आँखों में भरे पानी का कौतुक: [...] विख लेईत है.. मुला जबरई ठेलै लागी, यू कविताई की बेहयाई हम ते नाहिं होत । अबहिन  ई बेहया न...
    • zeal: डॉक्टर अमर, ' एकला चलो ' में जो मज़ा है वो कहीं नहीं....! जब ज्यादा लोग जुड़ जाते हैं तो अपनी अपनी ...
    • rakhshanda: आप चाहे कम लिखें..लेकिन अंदाज़ यही निराला होना चाहिए.......
    • rakhshanda: bahut khoob...ye to kamaal ka robot है, वैसे सच कहूँ तो जब आप लिखते हैं..चाहे वो कोई भी टोपिक क्यों ...
    • satish saxena: वाह भाई जी ! आनंद आ गया , इसे यहाँ मत चला देना सारा ब्लाग जगत ही बंद करा दोगे :-) बड़े दिन बाद आपको ...
    • विवेक रस्तोगी: लंतरानी अच्छी है, और ई रोबट को जनपथ पर बैठा दिया जाये तो मजा आये। :)...
    • डा. अमर कुमार: प्रवीण जी, आइन्दा ध्यान रखियेगा !
previous next
    • यह, आप और....., पैचान कौन ?

      GravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatarGravatar
      बहुत शुक्रिया..बड़ी मेहरबानी.
    • दर दर की चिप्पियाँ

      Blogger Elite Plebian अमिताभ बच्चन अल-क़ायदा आत्मग्लानि इलाहाबादी उनकी टिप्पणियों पर उर्दू कभी कभी मेरे दिल में... काला कोट काहे-भाई-काहे-परेशान-है खींचाताना चिट्ठाचर्चा संदर्भ चिट्ठा्चर्चा सँदर्भ टाइमपास टिप्पणी दीन और दाढ़ी न जाने क्यों परिभाषित न हो सका नास्तिक चिंतक निट्ठल्लेखंडे पाकिस्तान पूर्णेंदु सम्मान बनर-खुज़ली बात बेबाक बुरबकई बेतक़ल्लुफ़ बेनज़ीर बेसिर- पैर की भात दाल मिनी पोस्ट मिलीजुली सरकार मूड मेरा लिखा मत पढ़ो मेरी पड़ोसन मोमिन योनिरह्स्यकम सँग साथी सँगी साथी संदर्भहीन व्याख्यायें सत्ता के संघर्ष सहपाठी होली ख़ुदा के लिये फ़ुरसतिया
    • …… और चिन्दियाँ

      आपबीती उर्दू किसकी ज़ुबाँ कभी कभी मेरे दिल में... कमज़ोर सरकारों पर तलाश साफ़ सुथरे दिमाग की निट्ठल्लाकारी पाकिस्तान तलक बुरबकई बेतक़ल्लुफ़ ब्लॅगिया का झस मिनी पोस्ट मेरी लँतरानियाँ मॉडरेशन मॉडरेशन हरकत-उल-अमेरिका होली
    • नवी ताज़ी दिलखुश टिप्पणी

      • निठल्ले का भी कोई परिचय on झूठ पकड़ने वाला रोबॉट
      • आँखों में भरे पानी का कौतुक on मुला चिट्ठाचर्चा से इसका कउनौ रिलेशन नहिं है
      • zeal on बेशक पोस्ट टिप्पणीऽऽ ठेलो.. ..
      • rakhshanda on झूठ पकड़ने वाला रोबॉट
      • rakhshanda on झूठ पकड़ने वाला रोबॉट
      • satish saxena on झूठ पकड़ने वाला रोबॉट
      • विवेक रस्तोगी on झूठ पकड़ने वाला रोबॉट
      • डा. अमर कुमार on झूठ पकड़ने वाला रोबॉट
      • डा. अमर कुमार on झूठ पकड़ने वाला रोबॉट
    • हालिया पोस्ट्स

      • झूठ पकड़ने वाला रोबॉट
      • बेशक पोस्ट टिप्पणीऽऽ ठेलो.. ..
      • “… .. ….. .. … .. ? ”
      • आज कंमेंटियाने की ज़िद ना करो…
      • मैं चर्चा का पुरज़ोर विरोध करता हूँ…
      • ग़र होश जरा सा अब तक है फ़ाग़ी.. होश तू अपना तौल !
      • मुला चिट्ठाचर्चा से इसका कउनौ रिलेशन नहिं है
      • चलो, मेरा लिखा मत पढ़ो, पर इसको तो न छोड़ो
      • माडरेशन की प्रतीक्षा में
    • Who's Online

      5 visitors online now
      0 guests, 5 bots, 0 members
      Map of Visitors

    • User Login






      • Lost your password?
RSS Feeds

Copyright © 2010 बस यूँ ही निट्ठल्ला
Top