जब कौल कर ही लिया है, तो मैं आज कुछ न लिखूँगा.. तो आप भी कुछ न पढ़ना । आपको ब्लागवाणी पर यह ज़ब्बर टाइप शीर्षक दिखला कर यूँ ही फुसला कर बुला लूँ, और यहाँ एक वाह-वाह आलेख पकड़ा दूँ… यह  हमसे  न होगा ! अपने  मुँह मियाँ  मिट्ठू… वाः वाः कौन कहता है, कि  आपने  कभी  कोई  वाह-वाह पोस्ट भी लिखी है ? किसीके यह पूछने से पहले ही, यह बता देता हूँ कि, भाई इब मन्नैं भी एक गुट बना लिया है । आठ-दस फोन नम्बर भी बटोर लिया है । चाहोगे तो अपने पोस्ट किये जाने वाली टिप्पणी का डिक्टेशन भी दे दूँगा, मुफ़्त.. मुफ़्त.. मुफ़्त.. !
भले आप दरिया किनारे जाकर मुर्गी के अँडे छील कर उबाल लो, उस  उबले  अँडे का आमलेट तक हम्मैं निगलवा दो… लेकिन यह जान लो कि मेरी तो आठ-दस रेडीमेड वाह-वाह टिप्पणी  पक्की  ही  है । हमरा एक निर्गुट कबीर गैंग जो है । इसके सभी निर्गुणिया सदस्य , अपने  लोगों  के  लिये  वाह-वाह  हरमुनिया बजाने में निष्ठावान गुणी हैं । मैं अँट-शँट नहीं बक रहा भाई.. और  न  ही  मेरे  पास  इस  पोस्ट  को लँबा खींचने की फ़ुरसतिया-पावर है । डारविन के रिश्ते से स्वाइन जी कभी तो हमारे पितर रहे होंगे..
पितर  का कर्ज़ उतारने का मौका अच्छा रहा । सो, स्वाइन महाराज के तर्पण को एक पोस्ट लिखने बैठा, और फुस्स हो गया । बड़े लोचे हैं, इस स्टोरी में…. दायें  हाथ  मौत  बाँटी  जाती  है और  बायें  हाथ सँजीवनी  बेची  जाती है । चुनार के किले का तिलिस्म फेल.. नौगढ़  एवं  विजयगढ़  के  राजाओं  को ज़ालिम  क्रूर सिंह महाजन  के  आगे  पानी  भरते  देख  मेरा रहा-सहा  दिमाग  भी बौरा  गया । जरा मीडिया  की  कबूतरबाज़ी   थमे, तब्भी  मेरा  पोस्ट  चलेगा ! अक्खा यह अपुन का इंडिया है, जहाँ सभी उड़ाते चिड़िया हैं । धात्त.. मैंने तो कहा था कि, आज कुछ भी आँय बाँय शाँय नहीं लिखूँगा,.. आई एम सॉरी भाई ।6A1Aआज  ब्लागिंग  के  मद  में डेढ़  घँटे एलाट हुआ था । मैंनें  पहले ही कहा  था  न  कि, आज  कुछ  न लिखूँगा !   सो  लगे  हाथ  इसी  में  टाइम  खोटी  कर  लिया । परीक्षा  की  उत्तर-पुस्तिकाओं  पर  ऎसे टाइमपास  का अभ्यास  तो  बहुत  पहले ही  कर  लिया था । अब काम आ रहा है ।  आई एम सॉरी भाई !
बाँटो और दुआयें लो
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