मेरे मित्र डा. एस.एम. सिंह, यहाँ एक सफल आर्थोपेडिक सर्ज़न हैं । कभी वह कार्टूनिंग में दखल रखा करते थे । पर जैसा कि इस पेशे में होता है , अधिकाँश जन अपने शौक, ललित प्रतिभा और मनोलालसा को इस पेशे की बलि देने से रोक नहीं पाते । लगातार उकसाये जाने पर वह पिछले कुछ वर्षों से छिटपुट स्तर पर सक्रिय हो पाये हैं । कल्पना के धनी हैं, फिर भी शायद सौजन्यवश मुझसे भी कार्टून आइडिया की माँग कर बैठते हैं । और उसे पूरा भी करते हैं । प्रस्तुत है, उनके द्वारा रेखाँकित यह बानगी !

Image00081918 बहुधा यह सुनने में आता है, कि कुछ लेन-देन के मसलों को लेकर मरीज़ आपरेशन टेबल से वापस आ जाता है, यह कटाक्ष उधर ही है । यदि कोई आहत होता है, तो वह अपनी जिम्मेदारी पर मनमर्ज़ी अनुसार आहत होने को पूर्णतया स्वतँत्र है । मूर्छा सुँघाय के, होश उड़ाय कैऽ,चले नहीं जाना… ओ डाक्टर बेदर्दी !
मित्रोऽह् भवन्तु सुखिन्ः सर्वो भ्रूयात् शुभम् ! इति निट्ठलस्य् प्रगल्भम् ॥

बाँटो और दुआयें लो
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