पहेली बूझाने मैं तो आयी.. कहते हैं इसको चीन्हा-चिन्हाई !
चीन्हा-चिन्हाई … चीन्हा-चिन्हाईऽऽ.. चीन्हा-चिन्हाई ! रू रू रू
ब्लागिंग भई है, बमचिकाचिक…  त हमहूँ भये हैं, बमचिकाचिक ।
बमचिकाचिक देखो फोटू बमचिकाचिक ! चीन्हा-चिन्हाई … चीन्हा-चिन्हाईऽऽ.. चीन्हा-चिन्हाई ! रू रू रू

आजकल बड़ा बूझा और बुझाया  जा रहा है, सोचा निट्ठल्ले बैईठ से तो अच्छा है कि, हमहूँ कुछौ बूझि जाँचि लेयी..    कल हो ना हो ! वो क्या है कि,

कहते हैं ना ..यह ब्लागर की बस्ती है..यहाँ पोस्ट मँहगी और टिप्पणियाँ सस्ती है ।                                       सो, अँतरिम राहत के लिये  एक सस्ते दरों का पोस्ट दिया जा रहा है, निर्वाह कीजिये ।

pahchan-kaunयह ख़ानम बीते हुये ज़माने की खँडहर नहीं, क्योंकि यह स्वयँ ही कहती हैं कि, " मैं तो नब्बे वर्ष की ज़वान हूँ ! " अपने को भारत का प्रथम ’ न जानि क्या कुछ ’  बताती हैं । इनका नाम है.. उड़ी बाबा, ज़वाब तो आपको देना है । ज्ञानियों के तरकश तो तीरों से ख़ाली हो चुके हैं, इसलिये यहाँ अज्ञानियों का तुक्का भी बिना किसी मर्डरेशन के चलेगा । ज़रूरत बस इतनी ही है कि, चलाइये तो सही ?

बाँटो और दुआयें लो
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