लै भाई, मन्नैं बी इक पहेल्ली पूछ लैण दे ।
धन्यवाद भाई जी, तन्नैं होश दिलायी के बिन पहेल्ली पुच्छै इह निट्ठल्ले को ब्लागर मानता ए कोण्या ? भाई, आप बात तो ठीक कहवै सौं, बुरी सँगत में पड़कै, मैं भी बड्डी बड्डी पोस्ट लिखण लाग्यै लग सै । जे पहेल्ली ना पुच्छी ते फेर ब्लागर किस्सा ? आज रस्म अदा कैण वास्ते इक निट्ठल्ली पहेल्ली हो जाण दै । मन्नैं इनाम वीनाम देना कोणी, मर्ज़ी हो बूझ.. ना मर्ज़ी बने तो टिप्पण आले बक्से से परे नट जा । ये रही अपणी पहेल्ली..
एक मारे से मरा
काण खोल के पढ लै, एक मारे से मरा..
दो सँदेशे से मरे
और सँदेशी मरा जब तीन चले परदेश
ते कुल पहेल्ली यो करके बनी के
एक मारे से मरा
दो सँदेशे से मरे
सँदेशी मरा कब ?
जब तीन चले परदेश
मुस्किल आण पडी हो ते यो बता दूँ के…
यो पहेल्ली लाल लँगोटे वाले लँगूर के बास के खानदानी से मतलब राख्यै सै !
लगे हाथ निट्ठल्ले का ग़ज़नी के स्क्रीन टस्ट से रिजिक्ट फोट्टू भी देखता जा, यो पहेल्ली का हिस्सा नाय
..
| प्रिंट करें | बेफ़ालतू: डा. अमर कुमार लिखेला है । June 1, 2009 किलॉक को, टैम होयला 11:01 PM, बेतक़ल्लुफ़, होली में ! तुमारे वास्ते RSS 2.0 - पोस्ट फ़ीड लिंक इधरिच मिलेंगा ।. अपने साइट से टिप्पणी दो..चाहे ट्रैकबैक जोड़ो ! । |
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लगभग 1 वर्ष पहले
कुछ भी समझ नहीं आया ! लगा कि कुछ कुछ पुराने तर्ज की पहेली है जिसमें राक्षस की जान तोते तोती की नटई में होती थी और कुछ ऐसा ही आल तो जलाल तू टाईप का बोल बाल कर राजकुमार किसी तरह राक्षस को मार डालता था .
यह कोई डायिन साधक मन्त्र है क्या -और बुढाई दांव (क्षमा !) किस (अ ) घोर कृत्य में पड़ गए हैं?
लगभग 1 वर्ष पहले
या पहेळी तो पल्लै कोणी पडी |
लगभग 1 वर्ष पहले
घणी कलडी सै यो पहेली तो.
रामराम.
लगभग 1 वर्ष पहले
एक तो पहेलियों में वैसे अपना दिमाग नहीं चलता है .ऊपर से आप घने आई क्यू ओर डाल रहे है .ऐसा जुल्म नको नहीं करते महाराज…..गुरुवर…
लगभग 1 वर्ष पहले
मन्ने बैरो कोनी!!
लगभग 1 वर्ष पहले
भाई ड्रा जी मै तो इतना ज्यादा पढ्या लिखा नही इतनी आसन पहेली बूझ सकूं ,यु तो ताऊ ही बुझ सके है,या फ़िर तिवारी साहिब जी.
राम राम जी की
लगभग 1 वर्ष पहले
हे भगवान डागडर बाबुउ आप भी?
पहेली तो उलझा गयी है।…सोच कर आता हूँ
और तस्वीर तो हाय रेsssssssssssssss
लगभग 1 वर्ष पहले
हम तो कभ्भी ना पड़ते , पहेल्ली फहेल्ली के चक्कर में
कोई बहेल्ली सहेल्ली होए तो दीगर , वरना तो अपनी ‘ निठल्ली ‘ भली .
लगभग 1 वर्ष पहले
पल्ले न पड़ी
लगभग 1 वर्ष पहले
भाई जी
पल्ले नहीं पड़ रही है क्या कह्नू पर कहे देता हूँ
*एक को मारे तो दो मर जाए
तीसरो दहशत से मर जाए “
लगभग 1 वर्ष पहले
ये अबूझ पहेल्ली है, यही समझ न आ रहा कि जवाब कित्ते देणे हैं।
लगभग 1 वर्ष पहले
एक मारे से मरा
दो सँदेशे से मरे
सँदेशी मरा कब ?
जब तीन चले परदेश
–ये तो अंगद खबरी सी कहानी लग रही है..बाकी, इत्ती कठिन पहेली में तो दिशा भी दिख जाये तो बड़ी बात. :)
लगभग 1 वर्ष पहले
main te samajh gaya bhai..yo lugai apne khasam ne keh rahi hai ki je kasrat karte samay bhee blogger sign hee deekh raha thare ko to jaldiye ..kachhe se langot mein dikhegaa bhau…..
लगभग 1 वर्ष पहले
अब तो बता दीजिये महाराज :)
वैसे हम तो फोटू देख के गजनी के आमिर की तरह शोर्ट टर्म मेमोरी के चक्कर में उत्तर देते देते रह गए :)
लगभग 1 वर्ष पहले
ये लंगोटिए नजर आ रहे हैं कही लंगोट ही तो नहीं……
लगभग 1 वर्ष पहले
बूझ तो लिए है पर जवाब दे की नहीं ये नहीं बूझ पा रहे है..
लगभग 1 वर्ष पहले
एक मारे से मरा—-श्रवण कुमार
दो सँदेशे से मरे—–श्रवण के माता-पिता
सँदेशी मरा कब ?—-संदेशी राजा दशरथ की तब मृ्त्यु हुई
जब तीन चले परदेश—-जब श्री राम भाई लक्षमण और सीता जी सहित वनवास को गए।
ठीक है डाग्टर साहब्!!
लगभग 1 वर्ष पहले
मैटर पूरी तरह से अपठनीय है।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }
लगभग 1 वर्ष पहले
बहुत ही अच्छी पहेली थी, Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" जीका धन्तावाद,
हमारे बस की तो थी नहीं ते पहेली…..