आज बड़े खुश लग रहे हो ?
डिस्क्लेमर : यह पोस्ट श्री बज्राँग बली के नाम पर आरँभ किया जा रहा है, अनायास बिजली गुल हो जाने की दशा में पोस्ट पूरी न हो पाने का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व केन्द्र व निष्कामी राज्य सरकार का होगा । इसका मायाराज से कोई लेना देना नहीं है !
रायबरेलीवासी मतदान के तत्काल बाद से विद्युतबाधा के बँधक बने हैं । सोनिया भाभी से माया ननदिया को उचित नेग मिलने तक यह तमँचा लगा रहेगा । अतः ब्लागिंग की बत्ती भी गुल है ! अफ़सरान के चेहरे की बत्ती गुल है, चाटुकारों की बत्ती गुल है । हे कपि, समय पड़े पर तू ओबामा के सँग हो लिया और, कुसमय पर अपने देशी अडवानी श्रीराम चरण कमल रज से ही रूठ गया । उनकी छोड़, हम दीनों की तो सुन ले..
“ मुठिका एक महा कपि हनी ।
रुधिर बमत धरनीं ढनमनी ॥ “
अरर..रर..र.. बिजली जाने ही वाली है, आने का भरोसा भले ही न हो.. जाने का पूरा भरोसा रहता है । यानि कि कार्यक्षमता में पचास फ़ीसदी के सुधार से आप मुकर नहीं सकते । लुप्प लुप्प होन लगा भाई.. जल्दी समेट लें, जाण वाली है । जाने दो, मेरा क्या ?
आपको ही यह पोस्ट पूरी न पढ़ने को न मिलेगी (वैसे भी पढ़ते ही कब थे ?) आच्छा आच्छा, पढ़नी नहीं पड़ेगी.. तो सीधे सीधे ऎसे कहो न कि, इसीलिये आज बड़े खुश लग रहे हो !
| प्रिंट करें | बेफ़ालतू: डा. अमर कुमार लिखेला है । May 26, 2009 किलॉक को, टैम होयला 12:48 AM, बेतक़ल्लुफ़, होली में ! तुमारे वास्ते RSS 2.0 - पोस्ट फ़ीड लिंक इधरिच मिलेंगा ।. अपने साइट से टिप्पणी दो..चाहे ट्रैकबैक जोड़ो ! । |
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लगभग 1 वर्ष पहले
:)
लगभग 1 वर्ष पहले
<>(वैसे ही पढ़ते कब थे?)<>ये तो सरासर इल्जाम लगाया जा रहा है जी हम पर.. निठल्ली सरकार से हमें ये तो उम्मीद नहीं थी..
लगभग 1 वर्ष पहले
सोनिया भाभी और माया ननद. मनमोहन ने माया को कहा छोटी बहन ! हम कुछ नहीं कहेंगे :)
लगभग 1 वर्ष पहले
लो बोलो जी …आपके यहां बिजली नही है और हमारे यहां बिजली होते हुये भी नही देने देते. वो तो जब लगता है कि अब नही समेटी जायेगी तब जबरदस्ती चालू कर देती हैं. पर हमारा नगर निगम कहता है कि सुबह बिजली मत दो पानी चोरी के डर से.:) कोई युं दुखी कोई वैसे दुखी. नानक दुखिया सब संसार.
रामराम.
लगभग 1 वर्ष पहले
बहुत प्रसन्नता है। हमारे यहां बिजली अभी अभी आई है!
लगभग 1 वर्ष पहले
इधर कल से बिजली कटौती बंद हो गई। बिजली के खंबे आंधी से फिर से धराशाई होने तक के लिए?
लगभग 1 वर्ष पहले
हमारे यहाँ तो रोज लाइट मुंह दिखाई की रस्म दिन में कई बार निभाती रहती है
लगभग 1 वर्ष पहले
हम तो वैसे ही जेनेरेटर पर आश्रित हैं इन सुदूर कोने में…
लगभग 1 वर्ष पहले
आपन अपना दर्द डा. साहब . भारत में रहने पर यी आँख मिचौली का मजा भी आता है .अलसाने को जस्टीफाई करने का सुगम बहाना .मैं भी कई बार इस्तेमाल में ला चूका हूँ.
यहाँ ससुरी न्यूयार्क में जाने की छोडिये, वोल्टेज भी नहीं ऊपर नीचे होता .सारे हर समय काम कराई लेते हैं .भारत जैसा आनंद कहाँ ? ससुरे जिन्दगी में समतल ,नीरसता बिछाए पड़े हैं .
यहाँ के प्राणि फिर इन्तेज़ार कर रहे हैं की शायद फिर कभी भाग्य लहे और २००४ के जैसा कुछ घंटों केलिए ससुरी बिजुरिया जैसे बने जाए तो . तब कितनी परेशानी और कितना उत्पादन हानी हुयी हर ऐरे गिरे ने हर अख़बार टीवी ने न्यूज बना डाला . ३२ साल के बाद गयी थी .आनंद और उस आनंद जनित उत्पादन का , ९ माह बाद पता चला जब सर्वे हुआ , की उस दौर के आनंद परिणाम स्वरुप अस्पतालों में नवागंतुओं का जो उत्पादन हुआ , अस्पतालों में जगहों की किल्लत पड़ गयी . तब समझ आया अमेरिकनों की उन्नति का राज . ससुरे कोई भी मौका नहीं गंवाते , ये नहीं तो ये .लो उत्पादन और उसकी मार्केटिंग भी .
मेरा बस चले तो भारत में इतनी बिजली झोंक दूं घर घर ( उचक्कों के हित गली चौराहों को छोड़ ) बेड
रूम सहित १००० वाट की रोशनी हमेशा फ़ैली रहे और बंद करने का स्विच नदारत कर दूं .जनसंख्या पर अपने आपे नियंत्रण . लगो ससुरो सिर्फ सही उत्पादन में , घर से बाहर निकरि .
लेकिन न नौ मन तेल…….अब छोडिये .
अपने लिए बस इतना ही कहूँगा की थोडा आनंद मिश्रित भय व्याप गया है . हम भी जब गाँव आयेंगे आनंद लेंगे . आपके पडोसी प्रतापगढ़ के हम . वाहून बेवकूफों ने कांग्रस जीता दिया है. सौतिया डाह तो दोनों बहिन जी का आपने बता ही दिया है .एक तो कौनो वैसहीन हम यूं पी वालों को नहीं देती ,और कोई एक देने का मन भी बनाये तो दूसरकी बत्ती गुल करने पे आमादा . कर लो जो करना है सार्थक उत्पादन !
हर बार वोटरों की लिस्ट में इजाफा . जम के वोट दे रहे हैं . कम से कम घरे भीतरे आनंद ही आनंद . बाहर निकसने पे जो हो सो हो .
आप छोड़ दिए थे लाल लंगोटे वाले की जय आधे में
ही , शुरू कर के . तो …..
बोलो पवनसुत हनूमान की ……जय !
जय हो !
भय भी !
लगभग 1 वर्ष पहले
अमर भाई !
हमहूँ आपई की श्रेणी वाले निठल्ले .ऊपर से बताय चुके हैं की बिजली की कमी नहीं .और सब तो एक लाईना वाले ठहरे . पुचकार के चलता बने .हम आपकी पूरी पोस्ट से भी बड़ी टिप्पणी ठेल के भी जमे हैं .
वत्स अभिषेक ने एक ठेली है ….
“सोनिया भाभी और माया ननद .मनमोहन ने माया को कहा छोटी बहन ! हम कुछ नहीं कहेंगे .:) ”
फिर मुस्कियाय मार फूट लिए .
अरे पुत्तर तो ठीक है . बाकी का हम कह डारेंगे….
एक ठो लोकगीत सुने थे …….
घर से निकरी ननद भौजईया गजब दुयिनव जोड़ी रे ………………..सांवरिया .
बचिके गुरु !
(हम यूपी वालन के भाग्य में ‘ टू बन ठन भय इन वन ‘ )
जय हो !
भय भी !