डिस्क्लेमर : यह पोस्ट श्री बज्राँग बली के नाम पर आरँभ किया जा रहा है, अनायास बिजली गुल हो जाने की दशा में पोस्ट पूरी न हो पाने का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व केन्द्र व निष्कामी राज्य सरकार का होगा । इसका मायाराज से कोई लेना देना नहीं है !

रायबरेलीवासी मतदान के तत्काल बाद से विद्युतबाधा के बँधक बने हैं । सोनिया भाभी से माया ननदिया को उचित नेग मिलने तक यह तमँचा लगा रहेगा । अतः ब्लागिंग की बत्ती भी गुल है ! अफ़सरान के चेहरे की बत्ती गुल है, चाटुकारों की बत्ती गुल है । हे कपि, समय पड़े पर तू ओबामा के सँग हो लिया  और, कुसमय पर अपने देशी अडवानी श्रीराम चरण कमल रज  से ही रूठ गया ।  उनकी छोड़,  हम दीनों की तो सुन ले..

“ मुठिका एक महा कपि हनी ।

रुधिर बमत धरनीं ढनमनी ॥ “

अरर..रर..र.. बिजली जाने ही वाली है, आने का भरोसा भले ही न हो.. जाने का पूरा भरोसा रहता है । यानि कि कार्यक्षमता में  पचास फ़ीसदी के सुधार से आप मुकर नहीं सकते । लुप्प लुप्प होन लगा भाई.. जल्दी समेट लें, जाण वाली  है । जाने दो, मेरा क्या ?

आपको ही यह पोस्ट पूरी न पढ़ने को न मिलेगी (वैसे भी पढ़ते ही कब  थे ?) आच्छा आच्छा, पढ़नी नहीं पड़ेगी.. तो सीधे सीधे ऎसे कहो न कि, इसीलिये आज बड़े खुश लग रहे हो !

बाँटो और दुआयें लो
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