लगभग 1 वर्ष पहले - 29 comments
जब कौल कर ही लिया है, तो मैं आज कुछ न लिखूँगा.. तो आप भी कुछ न पढ़ना । आपको ब्लागवाणी पर यह ज़ब्बर टाइप शीर्षक दिखला कर यूँ ही फुसला कर बुला लूँ, और यहाँ एक वाह-वाह आलेख पकड़ा दूँ… यह हमसे न होगा ! अपने मुँह मियाँ मिट्ठू… वाः वाः कौन कहता है,
लगभग 1 वर्ष पहले - 18 comments
सोचा कुछ – हुआ कुछ और ही है निट्ठल्लों सँग ही ऎसा होता क्यूँ है सोचा कि कम्पू बेबी को हाथ न लगाऊँगा अपने सड़े विचारों का अचार पक न जाये जब तक शब्दों की खटास में तनिक मिठास न आये तब तक बेटी को फोन लगाया, उछल पड़ी " पापा सच्चीऽऽ ? बेटे को
लगभग 1 वर्ष पहले - 13 comments
पहिले निट्ठल्ला फोटुओं का इन्ट्राडेक्सन देगा : उसके बाद लिक्खेंगा.. लीखने का कुछ नेंईं जी, ईहाँ की तो पँच लाइन ही है.. “ सोचेला नहीं.. बस ठेलेला “ और जब सर पे ख्याल ही न मंडराएं, और बिल्कुल रहा ना जाए , तो ? तो क्या, यदि आप भी कोल्ड ड्रिंक देखि के चले आये
लगभग 1 वर्ष पहले - 13 comments
कितनी दुर्गन्ध फैल रही है ? क्या इतनी कि, बच्चा बच्चा नाक पर रूमाल रखने लगा है ? आज पर्यावरण दिवस पर यह एक रस्मी पोस्ट नहीं है, क्योंकि मेरे रिशि जी, ( इनसे आप यहाँ पहले मिल चुके हैं ) एक अलग तरह का सवाल पूछ बैठे । आज ही सुबह बगीचे में एक
लगभग 1 वर्ष पहले - 19 comments
धन्यवाद भाई जी, तन्नैं होश दिलायी के बिन पहेल्ली पुच्छै इह निट्ठल्ले को ब्लागर मानता ए कोण्या ? भाई, आप बात तो ठीक कहवै सौं, बुरी सँगत में पड़कै, मैं भी बड्डी बड्डी पोस्ट लिखण लाग्यै लग सै । जे पहेल्ली ना पुच्छी ते फेर ब्लागर किस्सा ? आज रस्म अदा कैण वास्ते इक निट्ठल्ली
लगभग 1 वर्ष पहले - 10 comments
डिस्क्लेमर : यह पोस्ट श्री बज्राँग बली के नाम पर आरँभ किया जा रहा है, अनायास बिजली गुल हो जाने की दशा में पोस्ट पूरी न हो पाने का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व केन्द्र व निष्कामी राज्य सरकार का होगा । इसका मायाराज से कोई लेना देना नहीं है ! रायबरेलीवासी मतदान के तत्काल बाद से विद्युतबाधा
लगभग 1 वर्ष पहले - 5 comments
शहीद की अगली कड़ी देनी है । साथ ही अपना भी कुछ लिखने का मन बन रहा है, पर विरोध या अंतर्विरोध का कोई स्वर निकल ही नहीं पा रहा । क्या करें ? सा रे गा से उठाने पर मा पर जाकर टिक जा रहा है ! यहीं से एक मुरकी लगाकर मा पर
लगभग 1 वर्ष पहले - 14 comments
यूँ तो अपन को किसी लफ़ड़े में पड़ने की आदत तो है, नहीं ? अब तक तक तो आप भी जान गये होंगे,कि, मैं अपना दामन बचा कर दूर से तमाशा देखने वाला एक आम शहरी आदमी हूँ । चाहें तो, मुझे शरीफ़ भी कह लीजिये, तो भी मैं बुरा न मानने का ! इसलिये
लगभग 1 वर्ष पहले - 13 comments
Technorati Tags: टिप्पणी,Controversy,चिट्ठाचर्चा,Blogger,निट्ठल्ला,Comments,Hindi Satire,Cartoon बाँटो और दुआयें लो
लगभग 1 वर्ष पहले - 12 comments
स्पीच का बात को पिरेस वाला इतना मच मच मचायेला कि मामला सीरियस हो रैली है, मैडम का वास्ते ! झप्पी बोले तो.. झप्पी ! अक्खा इंडिया में देखो.. पिरेस में गँदा लोग भरेला है, बाप ! तू जा के मैडम को सारी बोल दे , सरकिट ! सरकिट गोल ? अमर सिंग अपुन को
लगभग 1 वर्ष पहले
एक ठो सी ए को भी काम पर लगा देते तो थोड़ा आशीषे पाते इस बुड़बकई में. :)
लगभग 1 वर्ष पहले
स्विस बैंक का खाता आप भूल ही गये!
लगभग 1 वर्ष पहले
डाक्टर आप हैं ही। वकील दे दिया द्बिवेदीजी, सुरक्षा के लिये गौतम राजरिशी। सी.ए. खुद ही पीछे लगा है, धर लीजिये।
लगभग 1 वर्ष पहले
शुक्लजी ने सब फ़ैसला दे ही दिया है. अब और क्या चाहिये? :)
रामराम.
लगभग 1 वर्ष पहले
मंदी में काम तो मिला!
लगभग 1 वर्ष पहले
शुक्ल जी सही फ़रमा रहे हैं।वैसे आपके हिसाब से तो हमारा काम तमाम हो चुका है।बी पी के और एलर्जिक अस्थमा के मरीज़ है,सो एक नही कई ठो डाक्टर है,उनमे आधे से ज्यादा अपने दोस्त हैं।वकील भी लगे हुये हैं और ज़ेड तो नही मगर सरकारी सुरक्षा का लाभ हमे भी मिल चुका है जिसे मैने ही वापस कर दिया था।इस हिसाब से तो अपुन फ़िनीश,एकाध डिमांड और क्रियेट कर दिजीये डाकस्साब्।
लगभग 1 वर्ष पहले
गज़ब की पोस्ट….आप का सच में जवाब नहीं…(मैं भी मिकी की तरह हंसा इसे पढ़ कर…)
नीरज
लगभग 1 वर्ष पहले
बहुत बढिया।
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लगभग 1 वर्ष पहले
हर कुछ हासिल कर चुका और चाह अभी बाकी है? विरोधाभास :-)
लगभग 1 वर्ष पहले
अनिल पुसदकर को भी धरै लो डाक्टर -यी पत्रकार भी बड़े काम की चीज होई जाते हैं कभौ कभार !
लगभग 1 वर्ष पहले
फुरसतिया देव ने तो फरमान जारी कर दिया….कब आवें डाक्टर साब?
लगभग 1 वर्ष पहले
.दो चार सोने के सिक्को के बोरे भिजवा दीजिये गुरुवार …..बाकी सब अपने आप आ जायेंगे ….
लगभग 1 वर्ष पहले
आज अचानक जाने कैसे नन्हे मन तक पहुँचे और उसी रास्ते यहाँ तक आ पहुँचे….कुछ तो है जानकर…इधर उधर घूमते घूमते आपकी अम्माजी को मधुर स्नेहिल मुस्कान के साथ देखा… अच्छा लगा…